आखिर क्यों इंडोनेशिया के मुस्लिम इस्लाम छोड़, हिंदू धर्म अपना रहे है?
इंडोनेशिया के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति सुकर्णो की पुत्री सुकमावती ने 26 अक्टूबर 2021 को जैसे ही इस्लाम छोड़ हिन्दू धर्म अपनाया , भारत में इंडोनेशिया सुर्खियाँ बटोरने लगा। इंडोनेशिया में हिंदुओं की संख्या 2% से भी कम है और यहाँ के 17 हजार से अधिक द्वीप समूहों में बाली एकमात्र द्वीप है, जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक हैं। बावजूद, जिस प्रकार से लोग हिन्दू धर्म में लौट रहे हैं, यह किसी आश्चर्य से कम नहीं। इंडोनेशिया के हिन्दुओं के पास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसा कोई सामाजिक संगठन नहीं है। उनके पास भाजपा जैसा कोई राजनीतिक संगठन भी नहीं है। उनके पास ना कोई मठ है, ना कोई मठाधीश। ना कोई अम्बानी है ना अडानी। फिर भी ऐसा लग रहा है मानों विश्व का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश अब हिन्दू बन जाने को लालायित है। सत्तर के दशक में सुलावेसी द्वीप के तोराजा लोगों ने हिन्दू धर्म में लौटने के अवसर को सबसे पहले पहचाना था। 1977 में सुमात्रा के कारो एवं बाटाक और 1980 में कालीमंतन के गाजू एवं दायक भी हिन्दू की छत्रछाया में लौट आए। इसके बाद अनेक स्थानीय जिवात्मवादी एवं जनजातीय धर्मों ने भी अप...