CBI in Narendra giri case: नरेंद्र गिरी की मौत आखिर कैसे! 11 अनसुलझे सवाल और सीबीआई की जांच, क्या सुलझेगी मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी?
प्रयागराज
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जल्द ही सीबीआई टीम प्रयागराज पहुंचेगी और मामले को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू करेगी। ऐसे में एसआईटी अब तक जुटाए गए साक्ष्य और मिले निष्कर्ष को सीबीआई टीम को सौंप देगी, लेकिन सीबीआई के सामने भी इस मामले की तह तक जाना और खुलासा करना एक चुनौती होगा।
इस बीच सीबीआई जांच की खबर से आश्रम के अंदर और अधिकारियों के बीच भी खलबली की स्थिति है। क्योंकि इस घटना को लेकर आश्रम में रहने वालों से लेकर अधिकारी तक सवालों के घेरे में हैं। सीबीआई के सामने भी कई ऐसे सवाल होंगे जिनका जवाब तलाशना इतना आसान नहीं होगा।
इन बिंदुओं पर होगी जांच:
सूचना और एफआईआर में अंतर। घटना के बाद आधिकारिक सूचना दी गई कि दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे शिष्यों ने फांसी का फंदा काट कर शव नीचे उतारा। वहीं उनके शिष्य अमर गिरि ने एफआईआर दर्ज करवाई गई है कि धक्का देकर दरवाजा खोला गया।
गठिया के रोगी महंत कैसे बेड पर स्टूल रखकर चढ़े और कैसे उन्होंने पंखे से फांसी का फंदा लगाया?
पुलिस के आने से पहले शव क्यों उतारा गया? डॉक्टर को क्यों बुलाया नहीं गया? महंत को अस्पताल को क्यों नहीं ले जाया गया?
सुइसाइड नोट को वसीयत की तरह और टुकड़ों में क्यों लिखा गया? बार-बार काट-पीट क्यों की गई और हस्ताक्षर में भिन्नता क्यों है?
आत्महत्या उस कमरे में क्यों की, जहां महंत कम रहते थे? नरेंद्र गिरी अपने विश्राम कक्ष में आराम करते थे। कमरे का एसी भी खराब था।
कैंपस में दर्जन भर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अधिकांश काम कर रहे हैं, लेकिन कमरे के पास का सीसीटीवी कैमरा खराब था।
महंत पर पहले भी कई आरोप लगे, तब उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया फिर इस बार ही क्यों?
अधिकांश संतों का कहना है कि महंत लिखने में हिचकते थे तो इतना बड़ा नोट कैसे लिखा?
तथाकथित सुइसाइड नोट में उस व्यक्ति का जिक्र क्यों नहीं, जिसने उन्हें हरिद्वार से यह जानकारी दी कि वीडियो वायरल करने की तैयारी है।
एफआईआर सुइसाइड नोट से अलग क्यों करवाई गई, जबकि सुइसाइड नोट घटना के तुरंत बाद ही मिल गया था।
सुइसाइड नोट में तीन लोगों पर आरोप होने के बाद भी एफआईआर में आनंद गिरि का ही नाम क्यों?
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